पाकिस्तान की सरहद से 100 मीटर की दूरी पर पंजाब के गुरदासपुर का डेरा बाबा नानक.
ये वो जगह है, जहां जल्द ही पाकिस्तान के करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने वाले यात्रियों के लिए कॉरिडोर बनाया जाएगा.
एक कार्यक्रम में इस कॉरिडोर की नींव का पत्थर रखा जाएगा.
सोमवार को इस कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह शरीक होंगे.
ऐसे में डेरा बाबा नानक में 20-25 लोग आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं. इलाके में भारी पुलिस बल की भी तैनाती की गई है.
क्यों अहम है ये जगह?
सोमवार को होने वाले कार्यक्रम को भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के लिए अहम माना जा रहा है.
28 नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी सरहद पार कॉरिडोर की नींव रखेंगे. करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन इसकी भारत से दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है.
अब तक कुछ श्रद्धालु दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते रहे हैं. ये काम बीएसएफ की निगरानी में होता है.
मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.
माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.
70 साल बाद खुला गुरुद्वारा
क्या है स्थानीय लोगों की चिंता
अब जब दोनों देशों ने करतारपुर साहिब में कॉरिडोर बनाने की पहल हो रही है, तब स्थानीय लोगों के बीच थोड़ी चिंता ज़रूर है.
इसकी वजह इलाके में अचानक सुरक्षाबलों और आने वाले लोगों की भीड़ का बढ़ना है.
बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया, ''अभी तक जो जानकारी मिली हैं, वो अधूरी हैं. हम नहीं जानते हैं कि कैसा कॉरिडोर बनेगा और किस तरफ़ बनेगा.''
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